
जयशंकर का वैश्विक मंच को संदेश: UNSC में अफ्रीका को मिले स्थायी और अस्थायी सदस्यता में उचित स्थान
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में तत्काल सुधारों की पुरजोर वकालत की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वैश्विक निर्णय लेने वाली प्रक्रियाओं में भारत और अफ्रीका जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को अब अधिक समय तक कम प्रतिनिधित्व देकर नहीं रखा जा सकता।
इथियोपिया की राजधानी अदीस अबाबा स्थित ऐतिहासिक ‘अदवा विक्ट्री मेमोरियल म्यूजियम’ में आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए जयशंकर ने UNSC की स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में अफ्रीका के लिए न्यायसंगत प्रतिनिधित्व की मांग उठाई। उन्होंने 2023 में भारत की जी-20 अध्यक्षता के दौरान अफ्रीकी संघ (African Union) को जी-20 की स्थायी सदस्यता दिलाने के भारत के ऐतिहासिक प्रयासों को भी याद दिलाया।
व्यापार और विकास में मजबूत साझेदारी
अपनी तीन अफ्रीकी देशों की यात्रा के अंतिम पड़ाव पर पहुंचे विदेश मंत्री ने भारत और अफ्रीका के बीच प्रगाढ़ होते आर्थिक संबंधों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया:
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व्यापारिक संबंध: भारत आज अफ्रीका का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जिसके साथ द्विपक्षीय व्यापार लगभग 100 अरब अमेरिकी डॉलर के करीब पहुंच चुका है।
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विकास परियोजनाएं: भारत की सहायता से पूरे अफ्रीकी महाद्वीप में 4.5 अरब डॉलर मूल्य की 220 से अधिक विकास परियोजनाएं सफलतापूर्वक पूरी की जा चुकी हैं।
जयशंकर ने भारतीय व्यवसायों से अफ्रीका में निवेश बढ़ाने का आह्वान किया और खाद्य सुरक्षा, कृषि तथा सतत विकास (sustainable development) के क्षेत्रों में आपसी सहयोग को और गहरा करने पर जोर दिया।
ऐतिहासिक जुड़ाव और साझा भविष्य का विजन
1896 में अदवा के युद्ध में इतालवी सेना पर इथियोपिया की ऐतिहासिक विजय को याद करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि इस घटना ने दुनिया भर में उपनिवेशवाद विरोधी संघर्षों को प्रेरित किया था और भारत के स्वतंत्रता संग्राम के साथ भी इसका गहरा जुड़ाव रहा है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि 2047 तक भारत के विकसित राष्ट्र बनने का विजन और अफ्रीका का ‘एजेंडा 2063’ एक-दूसरे के पूरक हैं, जो दोनों क्षेत्रों के लिए समृद्धि और प्रगति के नए रास्ते खोलेंगे।



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